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बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए

बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए   हालत-ए-अफगानिस्तानी  जुल्म-ए-तालिबानी नजरिया-ए-अफगानि बंदूकों की नोंक पर जी रहा हूँ मैं अभी...  पल पल मर रहा हूँ... लेकीन जी रहा हूँ मैं कहीं...  आखरी पलों को गिन रहा हूँ मैं कहीं...  कबीरा दोहा याद आत है...  "बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए..."  बोया था किसी और ने... भोगेगा अब हर कोई....  सोचा नहीं था ये हस्र होगा... पता नहीं था समय के गर्भ मे बैठा ये विष का दंश होगा... 

शिक्षक-शिक्षा-शिक्षित

शिक्षक वही जो शिक्षित करे, शिक्षा वही जो मर्मज्ञ हो  शिक्षक दिवस का प्रणाम 🥰 धन्यवाद मुझे जीवन के आयामों पर शिक्षित करने के लिए... धन्यवाद निःस्वार्थ मार्गदर्शन के लिए... धन्यवाद मेरे जीवन के कुछ हिस्से के कुछ किस्से बनने के लिए... कुछ सीखा है, कुछ सीखना है...  यही दुआ करेगें की सीखने-सिखाने का ये दौर जीवन भर चलता रहे... एक बार फिर, मेरे जीवन के शिक्षक बनने के लिए धन्यवाद 🥰🙏🏼 आशीष

सातुड़ी तीज - सत्तू सी धाई के सुहाग से धाई

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सातुड़ी तीज - सत्तू सी धाई के सुहाग से धाई इस दिन के आने की आहट का एहसास कुछ अलग था... इस दिन के होने का ज़ज्बात कुछ अलग था... अधराते से हुए दिन की शुरूवात, चंदा दिखाई पर रुकनी थी... पूरे दिन जीवन साथी के हाल जानने का एहसास अलग ही था...  चन्दा कुछ रूठा यूँ था, की बदरा में छुपा वो था... बदरा चंदा की कशमकश का एहसास कुछ अलग था...  सत्तू से जो व्रत खुलनी थी... निकले जब सत्तू के सात ग्रास... हर निवाले का भाव कुछ अलग ही था... हर निवाले का ज़ज्बात कुछ अलग ही था... हर निवाले के साथ पूछे प्रश्न का एहसास ही अलग था... सत्तू सी धाई के सुहाग से धाई... और हर बार प्रश्न का उत्तर सुन मन का भाव कुछ और ही था...  "सुहाग से नी धाई, सत्तू से धाई"

The Knot - Highlights

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The Knot - Teaser

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[Poem] Hmmm, Its begun

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Hmmm, Its begun Yeah, I'm in a different zone, I'm in a different space  This is for sure, not a void Oh this is courtship! As though there exists a force... like gravity.  Oh, it's love!  It's invisible but it's here, right here Whether I accept it or not, it's here, right here  The sun doesn't "rise", but there it is everyday  It wouldn't matter, even if gravity pushed me away instead of pulling me in What matters is that force here that helped me be someone on this planet The force of love that tightens me... the force that makes me the person in this space  Thank you..  my Partner in Crime, Garima!!! ~ Ashish ~

[Poem] इश्क़ है जनाब...

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इश्क़ है जनाब...  इश्क़ है जनाब... रंग तो दिखाएगा ही... रंगीन तो पहले से ही थे जनाब हम... अब तो कमबख्त कमीना बनाएगा ही... ---- इश्क है जनाब... कभी हंसायेगा भी... कभी रुलायेगा भी... अब तो कमबख्त ये कमीना बनाएगा ही... ---- इश्क है जनाब,  ये कमबख्त रातों को जगाये गा भी... ये कमबख्त रातों को सुलायेगा भी... अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही... ---- इश्क है जनाब,  ये रूठेगा भी... मनायेगा भी...  ये अठखेलियाँ करेगा भी...  अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही... --- ~ आशीष ~