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शिक्षक-शिक्षा-शिक्षित

शिक्षक वही जो शिक्षित करे, शिक्षा वही जो मर्मज्ञ हो  शिक्षक दिवस का प्रणाम 🥰 धन्यवाद मुझे जीवन के आयामों पर शिक्षित करने के लिए... धन्यवाद निःस्वार्थ मार्गदर्शन के लिए... धन्यवाद मेरे जीवन के कुछ हिस्से के कुछ किस्से बनने के लिए... कुछ सीखा है, कुछ सीखना है...  यही दुआ करेगें की सीखने-सिखाने का ये दौर जीवन भर चलता रहे... एक बार फिर, मेरे जीवन के शिक्षक बनने के लिए धन्यवाद 🥰🙏🏼 आशीष

[Poem] इश्क़ है जनाब...

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इश्क़ है जनाब...  इश्क़ है जनाब... रंग तो दिखाएगा ही... रंगीन तो पहले से ही थे जनाब हम... अब तो कमबख्त कमीना बनाएगा ही... ---- इश्क है जनाब... कभी हंसायेगा भी... कभी रुलायेगा भी... अब तो कमबख्त ये कमीना बनाएगा ही... ---- इश्क है जनाब,  ये कमबख्त रातों को जगाये गा भी... ये कमबख्त रातों को सुलायेगा भी... अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही... ---- इश्क है जनाब,  ये रूठेगा भी... मनायेगा भी...  ये अठखेलियाँ करेगा भी...  अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही... --- ~ आशीष ~

[Poem] कहानी कान की...

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कहानी कान की...  पहले जनेऊ थी... जो कान पर लमूट लिया करती थी... फिर ऐनक आयी... जो कानों पर ठहरा करती थी... कुछ हुआ यूँ कि headphones 🎧 ने अपनी जगह ली... इतना सब ठीक था...  कान ने भी कहा कि मैं तो साइड में था भाई तब भी इतना बोझा... सामने होता तो क्या हाल करते...  इतना ही कहना हुआ था कि दो डोरीयां आयी और अब आकर सध गयी...  और बोली... दोस्त तुम ना होते तो शायद मैं मेरे आका की जिंदगी ना बचा पाता...  #wearmask   ~ आशीष ~  

[Thoughts] परिवार की परिभाषा क्या है?

परिवार ? वो जो कि जिंदगी के बाद म्रत्य काया के पास ना बेठे,  बल्कि , पहले दुःख सुख मे साथ बेठे,  चाहे करीब हो या दूर , कुछ पल सुकून के लगने लगे,  वो परिवार ही है | -- आशीष  --

[Thoughts] म्रत्यु

"म्रत्यु" म्रत्यु एक अंत नहीं,  आरम्भ है... कुछ अनंत काल के अनसुलझे समीकरणों का, कुछ क्षितिज पर बुने नए समीकरणों का,  इस आस से की वो सुलझेगे "आशीष"

[Poem] किसान की किसानीयत

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ये रक्त है... जो सुर्ख है... जो लाल है... इस खून में यूँ ही नहीं उबाल है...  कुछ रंग था उस जंग का...  वहीं रंग है इस जंग का...  कुछ लड़ी थी सरहदों पर...  आज भी लड़ी जा रहीं है सरहदों पर...  बन्द कमरों मे कुछ काग़ज़ों से जमीनी नाप ले गए...  ना नाप पाए किसान का सम्मान... ----------------------------------------- रक्त था जवान का...  रक्त है किसान का...  मोल ना  लगा था यूँ...  मोल ना लगेगा यूँ...  ना इंच एक हिला था तब,  ना इंच एक हिला हूँ अब...  माहौल सर्द है का...  उबाल है विचार का...  ...

[Thoughts] केसरिया

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केसरिया   प्रेम का रंग है केसरिया... प्रेमी के संग है केसरिया...  जंग का रंग केसरिया... वीरता का प्रमाण केसरिया... बलिदान का रंग केसरिया...  भोर का पहला स्पंदन केसरिया... सूर्य की पहली किरण केसरिया... करवा चौथ का चाँद केसरिया...  गाजर के हलवे मे केसरिया... पीले चावल मे केसरिया...  केसरिया एक रंग नहीं... एक भावना है... एक एहसास है... एक प्रमाण है... 

[Thoughts]: जीवंत प्रेरणा

  🤓 "जीवंत प्रेरणा" 🤓 कर गयी दस्तक मेरे चरित्र पर, कुछ ठहर सा गया था जीवन, वक़्त की धीमी रफ्तार ने, कुछ एसा झोंका दिया... कुछ आहट हुई... कुछ हलचल हुई... मानो कुछ शांत जल स्रोत मे कुछ हल्की तरंगे उठी... समझ आने लगे जीवन के कुछ किस्से... कुछ अनछुए हिस्से... मेरी " जीवंत प्रेरणा " के स्रोत से जो अनुभव मिले हर कदम पर साथ देते रहे... एसा लगा चल मैं रहा हूँ गति वो दे रहे हैं... लड़खड़ा में रहा हूँ... बैसाखी वो बन रहे हैं... 🙂 गुपचुप से दस्तक देकर, दस्तख़त के पन्नों के पीछे छुपा उभार मैं हूँ... 🙂 ये " जीवंत प्रेरणा " सम्मान है... जो दस्तख़त की प्रतिलिपि आजतक समय मे धूमिल ना हुई... ❤️❤️❤️

[Thoughts] कुछ यूं ही कह दूँ... कुछ यूं ही लिख दूँ...

कुछ यूं ही कह दूँ... कुछ यूं ही लिख दूँ...  for you  Anshul  हाँ माना की समय कम मिला, कुछ बतियाने का... कुछ ठहाके मारने का...  लेकिन जितना भी मिला... लगा "दो भाई" कुम्भ के बिछड़े मिल गए है...  सोचा तो था क्या रह जाएगा पीछे... घुमा तो पाया... कुछ पल... कुछ यादें... कुछ मुलाकातें... और Friday की कुछ long lasting बातें... सफर खूबसूरत था... अब और भी हसीन होने वाला है... पग पग पर पथ यूंही बदलने वाला है... यही बोलूंगा भाई, इस अंजान पथ पर चलते चलते खुद को मत भूल जाना... अपने आप को भूल जाए तो मुझसे गुफ़्तगू कर लेना... ~ आशीष ~

[Technical] Culture of Experimentation - Evolution of Software Systems

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Culture of Experimentation [CoE] - Evolution of software systems to support constant changes “The only constant in life is change”-Heraclitus Hello Techies, Recently I was reading  Building Evolutionary Architectures.  I came across a beautiful concept of " CULTURE OF EXPERIMENTATION " .  I thought it's worth sharing with you all.

[Anecdote] How I bought my BMW bike

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  How I bought my BMW bike   Happy Reading 😀 Here is the interesting story of how I purchased my first BMW bike. Back in 2017, when I came back to my native from Kolkata, I joined a company that was far from my home. Family forced me to drive a four-wheeler for my safety.  They somehow convinced me but it took around 30min in the morning and around 1h 30min  in the evening. I drove the car for a year and then I decided to purchase a bike that has good safety features and also takes brings down commute time on a daily basis. I researched a lot of bikes and in the end, it came down to BMW G 310R . Yes, I was fascinated with the blue and white logo color combinations.                                                          Just to give you background, I'm just a software engineer and also wanted to see what will remain i...

[Thoughts] Yes, I'll learn

[पंक्तियां]   हाँ, सीखते हैं!!!    शुरूवात के कुछ ब्लॉग लिखे तो समझ आया कितना मुश्किल है  भाषा  की  व्याकरण सुधरना...  वक़्त निकल गया सीखते सीखाते... सुधरते सुधारते...  क्या विचार और भावना की शुद्धता के कोई मायने नहीं है... क्या भाषा की व्याकरण का सही होना इंसान की पहचान बनाता है? अगर हाँ, तो सीखने मे क्या हर्ज है!!! जब ईश्वर से गलती हो सकती है तो मैं तो इंसान हूँ!!!