[Poem] इश्क़ है जनाब...
इश्क़ है जनाब...
इश्क़ है जनाब...
रंग तो दिखाएगा ही...
रंगीन तो पहले से ही थे जनाब हम...
अब तो कमबख्त कमीना बनाएगा ही...
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इश्क है जनाब...
कभी हंसायेगा भी...
कभी रुलायेगा भी...
अब तो कमबख्त ये कमीना बनाएगा ही...
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इश्क है जनाब,
ये कमबख्त रातों को जगाये गा भी...
ये कमबख्त रातों को सुलायेगा भी...
अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही...
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इश्क है जनाब,
ये रूठेगा भी... मनायेगा भी...
ये अठखेलियाँ करेगा भी...
अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही...
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~ आशीष ~

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