बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए
बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए
हालत-ए-अफगानिस्तानी
जुल्म-ए-तालिबानी
नजरिया-ए-अफगानि
बंदूकों की नोंक पर जी रहा हूँ मैं अभी...
पल पल मर रहा हूँ... लेकीन जी रहा हूँ मैं कहीं...
आखरी पलों को गिन रहा हूँ मैं कहीं...
कबीरा दोहा याद आत है...
"बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए..."
बोया था किसी और ने... भोगेगा अब हर कोई....
सोचा नहीं था ये हस्र होगा... पता नहीं था समय के गर्भ मे बैठा ये विष का दंश होगा...
Comments
Post a Comment