[Thoughts] कुछ यूं ही कह दूँ... कुछ यूं ही लिख दूँ...
कुछ यूं ही कह दूँ... कुछ यूं ही लिख दूँ...
for you Anshul
हाँ माना की समय कम मिला, कुछ बतियाने का... कुछ ठहाके मारने का...
लेकिन जितना भी मिला... लगा "दो भाई" कुम्भ के बिछड़े मिल गए है...
सोचा तो था क्या रह जाएगा पीछे... घुमा तो पाया... कुछ पल... कुछ यादें... कुछ मुलाकातें... और Friday की कुछ long lasting बातें...
सफर खूबसूरत था... अब और भी हसीन होने वाला है... पग पग पर पथ यूंही बदलने वाला है...
यही बोलूंगा भाई, इस अंजान पथ पर चलते चलते खुद को मत भूल जाना... अपने आप को भूल जाए तो मुझसे गुफ़्तगू कर लेना...
~ आशीष ~
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