[Thoughts] Yes, I'll learn

[पंक्तियां]  

हाँ, सीखते हैं!!!  

शुरूवात के कुछ ब्लॉग लिखे तो समझ आया कितना मुश्किल है भाषा की व्याकरण सुधरना... 


वक़्त निकल गया सीखते सीखाते... सुधरते सुधारते... 


क्या विचार और भावना की शुद्धता के कोई मायने नहीं है...


क्या भाषा की व्याकरण का सही होना इंसान की पहचान बनाता है?


अगर हाँ, तो सीखने मे क्या हर्ज है!!!


जब ईश्वर से गलती हो सकती है तो मैं तो इंसान हूँ!!!

Comments

Popular posts from this blog

बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए

[Poem] इश्क़ है जनाब...

शिक्षक-शिक्षा-शिक्षित