बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए हालत-ए-अफगानिस्तानी जुल्म-ए-तालिबानी नजरिया-ए-अफगानि बंदूकों की नोंक पर जी रहा हूँ मैं अभी... पल पल मर रहा हूँ... लेकीन जी रहा हूँ मैं कहीं... आखरी पलों को गिन रहा हूँ मैं कहीं... कबीरा दोहा याद आत है... "बोये बीज़ बबूल का अमिया कहाँ से होए..." बोया था किसी और ने... भोगेगा अब हर कोई.... सोचा नहीं था ये हस्र होगा... पता नहीं था समय के गर्भ मे बैठा ये विष का दंश होगा...
इश्क़ है जनाब... इश्क़ है जनाब... रंग तो दिखाएगा ही... रंगीन तो पहले से ही थे जनाब हम... अब तो कमबख्त कमीना बनाएगा ही... ---- इश्क है जनाब... कभी हंसायेगा भी... कभी रुलायेगा भी... अब तो कमबख्त ये कमीना बनाएगा ही... ---- इश्क है जनाब, ये कमबख्त रातों को जगाये गा भी... ये कमबख्त रातों को सुलायेगा भी... अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही... ---- इश्क है जनाब, ये रूठेगा भी... मनायेगा भी... ये अठखेलियाँ करेगा भी... अब तो कमबख्त इश्क अपना कमीनापन तो दिखाएगा ही... --- ~ आशीष ~
शिक्षक वही जो शिक्षित करे, शिक्षा वही जो मर्मज्ञ हो शिक्षक दिवस का प्रणाम 🥰 धन्यवाद मुझे जीवन के आयामों पर शिक्षित करने के लिए... धन्यवाद निःस्वार्थ मार्गदर्शन के लिए... धन्यवाद मेरे जीवन के कुछ हिस्से के कुछ किस्से बनने के लिए... कुछ सीखा है, कुछ सीखना है... यही दुआ करेगें की सीखने-सिखाने का ये दौर जीवन भर चलता रहे... एक बार फिर, मेरे जीवन के शिक्षक बनने के लिए धन्यवाद 🥰🙏🏼 आशीष
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