[Poem] कहानी कान की...
कहानी कान की...
पहले जनेऊ थी... जो कान पर लमूट लिया करती थी...
फिर ऐनक आयी... जो कानों पर ठहरा करती थी...
कुछ हुआ यूँ कि headphones 🎧 ने अपनी जगह ली...
इतना सब ठीक था...
कान ने भी कहा कि मैं तो साइड में था भाई तब भी इतना बोझा... सामने होता तो क्या हाल करते...
इतना ही कहना हुआ था कि दो डोरीयां आयी और अब आकर सध गयी...
और बोली...
दोस्त तुम ना होते तो शायद मैं मेरे आका की जिंदगी ना बचा पाता...

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