[Poem] हाँ, कहीं जिंदा हूँ मैं...
हाँ, कहीं जिंदा हूँ मैं... किसी के ग़म में, गुम हो जाऊँ... हाँ, जिंदा हूँ मैं... किसी की खुशी मैं, खिलखिला जाऊँ... हाँ, जिंदा हूँ मैं... नवजात की किलकारी से आंखे भर आए... हाँ, जिंदा हूँ मैं... किसी रिश्ते के दूर हो जाने से, रिक्त स्थान बना रहे... हाँ, जिंदा हूँ मैं... किसी की जीवन चक्र संपूर्ण हो, और सहानुभूति का भाव आता रहे... हाँ, जिंदा हूँ मैं... राह पर चलते किसी पत्थर को हटा देना, सम्वेदना के स्पन्दन होता रहे... हाँ, जिंदा हूँ मैं... जीवन का इस प्रकृति के हर कण से, हर एक भाव से करुणा बनी रहे... हाँ जिंदा हूँ मैं... इन पंक्तियों से तुम्हारे मनःस्थिति पर हलचल कर जाऊँ... हाँ जिंदा हूँ मैं... ~ आशीष ~